| वही आंगन, वही खिड़की, वही दर याद आता है, | ||||||
| मैं जब भी तन्हां होता हूं, मुझे घर याद करता है। | ||||||
| मेरे सीने की हिचकी भी, मुझे खुलकर बताती है, | ||||||
| तेरे अपनों को गांव में, तू अक्सर याद आता है। | ||||||
| जो अपने पास हो उसकी कोई कीमत नहीं होती, | ||||||
| हमारे भाई को ही लो, बिछड़कर याद आता है। | ||||||
| सफलता के सफर में तो कहां फुर्सत के, कुछ सोचें, | ||||||
| मगर जब चोट लगती है, मुकद्दर याद आता है। | ||||||
| मई और जून की गर्मी, बदन से जब टपकती है, | ||||||
| नवंबर याद आता है, दिसंबर याद आता है। | ||||||
| SURENDRA THAKUR (A-Gyaniji) | ||||||
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Tuesday, April 5, 2011
मुझे घर याद करता है।
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